आचार्य महाप्रज्ञ (1920-2010) एक भारतीय जैन संन्यासी, दार्शनिक और आध्यात्मिक नेता थे, जो जैन तेरापंथ धर्मीय संघ के दसवें मुखिया के रूप में सेवा करते थे। उन्होंने राजस्थान, भारत में जन्म लिया था और दस साल की उम्र में संन्यासी के रूप में दीक्षा ली थी। आचार्य महाप्रज्ञ एक उत्कृष्ट लेखक थे और उनकी रचनाएँ दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर फैली हुई थी। आचार्य महाप्रज्ञ अहिंसा, अन्तर्धर्मीय संवाद और पर्यावरण संरक्षण पर बल देते थे। उन्होंने अंतरंग रूप से बदलाव करने के लिए ध्यान का उपयोग करने की जोरदार प्रतिज्ञा ली थी और सभी वर्गों के लोगों को इसका अभ्यास करने की सलाह दी थी। आचार्य महाप्रज्ञ ने भारतीय समाज में सामाजिक सद्भाव और शांति को बढ़ावा देने के लिए काम किया था।
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